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मंगल की सेवा सुन मेरी देवा, हाथ जोड़ तेरे द्वार खड़े। पान सुपारी ध्वजा नारियल, ले ज्वाला तेरी भेंट धरे॥ सुन जगदम्बे कर न विलम्बे, संतन के भंडार भरे। संतन प्रतिपाली सदा खुशहाली, जय काली कल्याण करे॥ मंगल की सेवा सुन मेरी देवा॥ बुद्धि विधाता तू जग माता, मेरा कारज
अम्बे तू है जगदम्बे काली, जय दुर्गे खप्पर वाली। तेरे ही गुण गाएं भारती, ओ मैया हम सब उतारें तेरी आरती॥ तेरे भक्त जनों पर माता, भीड़ पड़ी है भारी। दानव दल पर टूट पड़ो माँ, करके सिंह सवारी॥ सौ-सौ सिंहों से बलशाली, अष्ट भुजाओं वाली। सतियों के सत को
जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी। तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥ ॐ जय अम्बे गौरी॥ मांग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को। उज्ज्वल से दोउ नैना, चंद्रवदन नीको॥ ॐ जय अम्बे गौरी॥ कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै। रक्तपुष्प गल माला, कंठन पर साजै॥ ॐ जय अम्बे गौरी॥ केहरि वाहन
ॐ जय शिव ओंकारा,स्वामी जय शिव ओंकारा। ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव,अर्द्धांगी धारा॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥ एकानन चतुराननपञ्चानन राजे। हंसासन गरूड़ासनवृषवाहन साजे॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥ दो भुज चार चतुर्भुजदसभुज अति सोहे। त्रिगुण रूप निरखतेत्रिभुवन जन मोहे॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥ अक्षमाला वनमालामुण्डमाला धारी। त्रिपुरारी कंसारीकर माला धारी॥
॥ जय श्री राम ॥ ॐ ॥ श्री हनुमान चालीसा ॥ ॥ दोहा ॥ श्री गुरु चरण सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि। वरनऊँ रघुवर विमल जसु, जो दायकु फल चारि॥ बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरो पवन कुमार। बल बुद्धि विद्या देहु मोहिं, हरहु कलेश विकार॥ ॥ चौपाई॥ जय
